हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम रिजेक्ट हो गया? अब क्या करें
क्लेम रिजेक्ट होना अंतिम फ़ैसला नहीं है। रिजेक्शन लेटर में लिखा असली कारण पढ़ें, पॉलिसी, प्रपोज़ल फ़ॉर्म, डॉक्टर का सर्टिफ़िकेट और अस्पताल के कागज़ जुटाएँ, और बीमा कंपनी के शिकायत अधिकारी (GRO) को लिखित शिकायत दें। अगर 14 दिन में हल न हो तो IRDAI के बीमा भरोसा पोर्टल पर और फिर बीमा लोकपाल (Insurance Ombudsman) के पास जाएँ — यह निःशुल्क है, ₹50 लाख तक के क्लेम सुनता है और इसका फ़ैसला बीमा कंपनी पर बाध्यकारी होता है।
Step by step
रिजेक्शन का कारण पढ़ें
हर रिजेक्शन लेटर में एक कारण लिखा होता है — बीमारी छिपाना (non-disclosure), पहले से मौजूद बीमारी (PED), वेटिंग पीरियड, पॉलिसी एक्सक्लूज़न, "अस्पताल में भर्ती ज़रूरी नहीं थी" या देर से सूचना। आगे का हर कदम इसी कारण का जवाब होगा।
चार दस्तावेज़ जुटाएँ
पॉलिसी के नियम-शर्तें, आपका भरा हुआ प्रपोज़ल फ़ॉर्म (बीमा कंपनी से कॉपी माँगें), इलाज करने वाले डॉक्टर का सर्टिफ़िकेट कि बीमारी पहली बार कब पता चली, और अस्पताल की पूरी फ़ाइल — डिस्चार्ज समरी, जाँच रिपोर्ट, बिल।
मोरेटोरियम देखें
IRDAI के 2024 के नियम के अनुसार लगातार 60 महीने (5 साल) की पॉलिसी के बाद बीमा कंपनी धोखाधड़ी साबित किए बिना "बीमारी छिपाने" के आधार पर क्लेम रिजेक्ट नहीं कर सकती। पहले से मौजूद बीमारी का वेटिंग पीरियड अधिकतम 36 महीने है।
बीमा कंपनी से लिखित शिकायत
शिकायत अधिकारी (Grievance Redressal Officer) को कारण का जवाब दस्तावेज़ों के साथ लिखें। कंपनी को 14 दिन में शिकायत निपटानी होती है।
बीमा भरोसा पर शिकायत
हल न होने पर bimabharosa.irdai.gov.in पर शिकायत दर्ज करें, या टोल-फ़्री 155255 / 1800-4254-732 पर कॉल करें, या complaints@irdai.gov.in पर ईमेल करें।
बीमा लोकपाल के पास जाएँ
बीमा कंपनी के अंतिम जवाब के एक साल के अंदर। कोई फ़ीस नहीं, वकील ज़रूरी नहीं, ₹50 लाख तक के क्लेम। पूरी शिकायत मिलने के लगभग तीन महीने में फ़ैसला, जो बीमा कंपनी को 30 दिन में मानना होता है।
उपभोक्ता अदालत
ज़िला आयोग ₹50 लाख तक, राज्य आयोग ₹2 करोड़ तक, उससे ऊपर राष्ट्रीय आयोग। रिजेक्शन के 2 साल के अंदर ऑनलाइन शिकायत की जा सकती है।
कौन-से रिजेक्शन अक्सर पलट जाते हैं
- बीमारी पॉलिसी लेने के बाद पता चली, फिर भी "बीमारी छिपाने" का आरोप
- डिस्चार्ज समरी में मरीज़ के कहे अनुसार लिखी एक लाइन ही सबूत
- 60 महीने की लगातार पॉलिसी के बाद भी non-disclosure का कारण
- "भर्ती ज़रूरी नहीं थी" — जबकि डॉक्टर लिखकर कारण दे सकते हैं
- रूम रेंट के नाम पर दवा, इम्प्लांट या जाँच पर कटौती
Medilock से कानूनी सहायता
Medilock आपकी ओर से बीमा कंपनी, IRDAI, बीमा लोकपाल और ज़रूरत पड़ने पर उपभोक्ता अदालत तक केस लड़ता है। लीगल फ़ीस: जो रक़म वास्तव में सेटल होकर आपको मिले, उसका 15% + GST। अगर क्लेम अंत में रिजेक्ट रहता है तो आपको कुछ नहीं देना।
Related guides
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हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम रिजेक्ट हो जाए तो सबसे पहले क्या करें?
रिजेक्शन लेटर में लिखा कारण पढ़ें और बीमा कंपनी से अपने प्रपोज़ल फ़ॉर्म की कॉपी लिखकर माँगें। फिर उसी कारण का जवाब दस्तावेज़ों के साथ शिकायत अधिकारी को दें।
बीमा लोकपाल में शिकायत की फ़ीस कितनी है?
कोई फ़ीस नहीं है और वकील की ज़रूरत नहीं। लोकपाल ₹50 लाख तक के क्लेम सुनता है।
लोकपाल के पास कब तक जा सकते हैं?
बीमा कंपनी के अंतिम जवाब से एक साल के अंदर, या लिखित शिकायत के एक महीने बाद भी जवाब न आए तो।
क्या 5 साल बाद बीमारी छिपाने के आधार पर क्लेम रिजेक्ट हो सकता है?
IRDAI के 2024 के नियम के अनुसार 60 महीने की लगातार पॉलिसी के बाद नहीं — सिर्फ़ धोखाधड़ी साबित होने पर।